श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)
Shri Bhaktamal of Nabhadas with Priyadas Commentary
गोस्वामी नाभादास जी / प्रियादास जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७०) (श्री भक्तमाल प्रान पयानौ करत, नेह रघुपति सौं जोर्यौ। सुत दारा धन धाम, मोह तिनका ज्यौं तोर्यौ॥ कौंधनी ध्यान उर में बस्यौ, राम नाम मुख जानकी। भक्तपक्ष उद्दारता, यह निवही कल्यान की॥१८६॥ श्रीसन्तदासजी, श्रीमाधवदासजी सोदर सोभूराम के, सुनौं सन्त तिनकी कथा॥ सन्तदास सद्वृत्ति, जगत् छोई करि डार्यौ। महिमा महा प्रवीन, भक्तवित धर्म विचार्यौ॥ बहुर्यो माधवदास, भजन बल परचौ दीनौ। करि जोगिन सौं वाद, श्वसन पावक प्रति लीनौ॥ परम धर्म विस्तार हित, प्रगट भये नाहिन तथा। सोदर सोभूराम के, सुनौ सन्त तिनकी कथा॥१६०॥ श्रीजसवन्तजी बूड़िये विदित कन्हर कृपाल, आत्माराम आगम दरसि॥ कृष्ण भक्ति को थम्भ, ब्रह्मकुल परम उजागर। क्षमा शील गम्भीर, सर्व लच्छन कौ आगर॥ सर्वसु हरिजन जानि, हृदै अनुराग प्रकासै। असन वसन सनमान, करत अति उज्ज्वल आसै॥ सोभूराम प्रसाद तें, कृपादृष्टि सब पर बरसि। बूड़िये विदित कन्हर कृपाल, आत्माराम आगम दरसि॥१६१॥ श्रीगोविन्ददासजी ''भक्तमाली'' भक्तरत्न माला सुधन, गोविन्द कण्ठ विकास किय॥