भारतकोश
श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)

श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)

Shri Bhaktamal of Nabhadas with Priyadas Commentary

गोस्वामी नाभादास जी / प्रियादास जी द्वारा

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कथन श्रवण की महिमा) (१७७ कथन-श्रवण की महिमा जग कीरति मंगल उदै, तीनों ताप नसायँ। हरिजन को गुण बरनते, हरि हृदि अटल बसायँ ॥२०८॥ हरिजन को गुण बरनते, जो करै असूया आय। इहाँ उदर बाढ़ै विथा, औ परलोक नसाय ॥२०९॥ जौं हरि प्राप्ति की आस है, तौ हरिजन गुन गाय। नतरू सुकृत भुजे बीज ज्यौं, जनम-जनम पछिताय ॥२१०॥ भक्तदाम संग्रह करै, कथन स्रवन अनुमोद। सो प्रभु प्यारौ पुत्र ज्यौं, बैठै हरि की गोद ॥२११॥ अच्युतकुल जस बेर यक, जाकी मति अनुरागि। उनकी भक्ति भजन को, निहचैं होय विभागि ॥२१२॥ भक्तदाम जिन-जिन कथौ, तिनकी जूठनि पाय। मों मतिसार अक्षर द्वै, कीनों सिलौ बनाय ॥२१३॥ काहू के बल जोग जज्ञ, कुल करनी की आस। भक्तनाम माला "अगर", उर (बसौ) नारायणदास ॥२१४॥ ।। इति श्रीनाभाजी कृत मूल-भक्तमाल सम्पूर्ण ।। •