भारतकोश
श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)

श्री भक्तमाल (नाभादास जी कृत - प्रियादास जी टीका सहित)

Shri Bhaktamal of Nabhadas with Priyadas Commentary

गोस्वामी नाभादास जी / प्रियादास जी द्वारा

DevanagariHindipublished195 पृष्ठ

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नवों नन्दजी) (३१ श्रीराम सचिव पावैं भक्ति अनपायिनी जे, राम सचिव सुमिरन करैं। धृष्टी विजय जयन्त, नीति पर शुचि सुविनीता। राष्ट्र विवर्धन निपुण, सुराष्ट्र परम पुनीता।। अशोक सदा आनन्द, धर्मपालक तत्ववेत्ता। मन्त्रीवर्य सुमन्त्र, चतुर्जुग मन्त्री जेता।। अनायास रघुपति प्रसन्न, भवसागर दुस्तर तरैं। पावैं भक्ति अनपायिनी जे, राम सचिव सुमिरन करैं।।१९।। श्रीराम सहचरवर्ग शुभदृष्टि वृष्टि मो पर करौ, जे सहचर रघुवीर के।। दिनकर सुत हरिराज, बालिवछ केसरि औरस। दधिमुख द्विविद मयन्द, रिच्छपति सम को पौरस।। उल्का सुभट सुषेन, दरीमुख कुमुद नील नल। सरभ रु गवय गवांच्छ, पनस गन्धमादन अति बल।। पद्म अठारह यूथपाल, रामकाज भट भीर के। शुभदृष्टि वृष्टि मो पर करौ, जे सहचर रघुवीर के।।२०।। नवों नन्दजी ब्रज बड़े गोप पर्जन्य के, सुत नीके नव नन्द।। धरानन्द ध्रुवनन्द, तृतीय उपनन्द सुनागर। चतुर्थ तहाँ अभिनन्द, नन्द सुखसिन्धु उजागर।। सुठि सुनन्द पशुपाल, निर्मल निश्चय अभिनन्दन। कर्मा धर्मानन्द अनुज, वल्लभ जग वन्दन।। आस पास वा बगर के, जहाँ विहरत पशुप सुछन्द। ब्रज बड़े गोप पर्जन्य के, सुत नीके नव नन्द।। २१।।