भारतकोश
श्री गुरु गीता (स्कन्द पुराण - उमा-महेश्वर संवाद सान्वय सटीक)

श्री गुरु गीता (स्कन्द पुराण - उमा-महेश्वर संवाद सान्वय सटीक)

Shri Guru Gita from Skanda Purana with Hindi Commentary

भगवान् शिव / महर्षि वेदव्यास / डॉ. मोतीलाल खद्दर शास्त्री द्वारा

DevanagariSanskritpublished82 पृष्ठ

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प्रस्तावना कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् यह एक प्रसिद्ध उक्ति है इसके अनुसार भगवान् कृष्ण को जगद्गुरु माना गया है वर्तमान समय मे श्री शंकराचार्य जी को जगद्-गुरु माना जाता है. यदि हम जगद्गुरु शब्द का अर्थ निकालें तो जगत् का अर्थ है यह सम्पूर्ण दृश्यमान प्रपञ्च अर्थात् सम्पूर्ण विश्व. गुरु शब्द में गु तथा रु दोनों के भिन्न-भिन्न अर्थ हैं गु का अर्थ है अन्धकार तथा रु का अर्थ है प्रकाश. अर्थात जो अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाये. इस प्रकार जगद्गुरु का अर्थ हुआ जो सम्पूर्ण विश्व को अज्ञान रूपी अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाए. वस्तुतः यह जो दृश्यमान जगत् है वह मिथ्या है उसके मिथ्यत्व को प्रकाशित करने के कारण ही सम्भवतः जगद्गुरु इस उपाधि से शंकराचार्य जी को विभूषित किया गया है. भगवान् श्री कृष्ण और श्रीमद् आदि शंकराचार्य भगवत्पाद भारतीय इतिहास के ऐसे दो महत्वपूर्ण स्तम्भ हैं जिससे (7)