श्री गुरु गीता (स्कन्द पुराण - उमा-महेश्वर संवाद सान्वय सटीक)
Shri Guru Gita from Skanda Purana with Hindi Commentary
भगवान् शिव / महर्षि वेदव्यास / डॉ. मोतीलाल खद्दर शास्त्री द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसूत उवाच :- कैलासशिखरे रम्ये भक्तिसाधननायकं। प्रणम्य पार्वती भक्त्या शंकरं परिपृच्छति ॥२॥ सूत उवाच :- शौनकादि ऋषियों के प्रश्न को सुनकर सूत जी बोले जो कुछ आप गुरुगीता के सहारे आप हमसे जानना चाहते हैं प्राचीन काल में एक बार माता पार्वती ने भूतभावन भोलेनाथ से ऐसा ही प्रश्न बड़ी विनम्रता से पूछा और जो कुछ कैलाश पर्वत पर भोलेनाथ ने महिमा का बखान किया मैं विस्तार से उसको कहता हूं सावधानी से सुनो। ०२ पार्वत्युवाच :- ॐ नमो देवदेवेश परात्पर जगद्गुरो। सदाशिव महादेव गुरुदीक्षां प्रदेहि मे ॥३॥ केन मार्गेण भो स्वामिन् देही ब्रह्ममयो भवेत्॥४॥ त्वं कृपां कुरु मे स्वामिन्नमामि चरणं तव॥५॥ पार्वती उवाच :- सूतजी कहते हैं कि ऋषियों जगत जननी जगदम्बा स्वरूपा माता पार्वती बड़ी विनम्रता से शिवजी से पूछी "हे देवाधदेव महादेव मैं आपके चरण-शरण मे हूं इसलिये हम पर अपनी कृपा करते हुये गुरुदीक्षा के क्रम में ऐसे अनुपम मार्ग का मार्गदर्शन करिये जिसके सहारे जीवात्मा अपने आत्म स्वरूप को पूर्ण तरह पहचान ले और मुक्त हो जाए। ऐसे मार्ग का मार्गदर्शन करें। ०३ ०४ ०५ ( 17 )