श्री गुरु गीता (स्कन्द पुराण - उमा-महेश्वर संवाद सान्वय सटीक)
Shri Guru Gita from Skanda Purana with Hindi Commentary
भगवान् शिव / महर्षि वेदव्यास / डॉ. मोतीलाल खद्दर शास्त्री द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमें अखण्ड आयु, आरोग्यता, ऐश्वर्य तो प्राप्त करता है साथ ही उसका कुल, उसका परिवार, पुत्र, पौत्र, धन धान्य से पूर्ण होता है और साथ ही मोक्ष की प्राप्ति करता है। ८६ अवैधव्यं सकामा तु लभते चान्यजन्मनि। सर्वदुःखभयं विघ्नं नाशयेत तापहारकं ॥८७॥ महिमा का विशद वर्णन क्रम में अब सूतजी कहते हैं कि इस गीतापाठ से सारी मनोकामना पूर्ण हो जाती है, कार्य में कोई रूकावट नहीं आती है और मानो कि दूसरा जन्म मिलता भी है तो जीवन में कोई दुख नहीं होता, तीनों तापों का निवारण हो चुका रहता है। ८७ सर्वबाधाप्रशमनं धर्मार्थकाममोक्षदं। यं यं चिंतयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चितं ॥८८॥ यह गुरुगीता पाठ जो करता है उसकी सारी बाधा दूर हो जाती है, धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चारों पुरुषार्थ की सहजता मे प्राप्ति होती है और वह जिस जिस क्षेत्र में बढ़ता है उसे पाठ के प्रभाव से सफलता प्राप्त होती है इसलिए गुरुगीता से अधिक कुछ भी नहीं है। ८८ कामधेनुः कामितस्य कल्पितस्य च कल्पदः। चिन्तामणिश्चिंतितस्य सर्वमंगलकारकं ॥८९॥ सूतजी कहते हैं कि कामधेनुः कामना पूर्ण करती है, कल्पवृक्ष स्वर्ग सम्पत्ति देता है, चिंतामणि हर प्रकार की बाधा चिन्ता दूर करता हुआ हर प्रकार का मंगल शुभ फल प्रदान करता है। ८९ ( 42 ) Prof. Madhav Prasad Lamichhane Collection, Kathmandu, Nepal