श्री गुरु गीता (स्कन्द पुराण - उमा-महेश्वर संवाद सान्वय सटीक)
Shri Guru Gita from Skanda Purana with Hindi Commentary
भगवान् शिव / महर्षि वेदव्यास / डॉ. मोतीलाल खद्दर शास्त्री द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंCC-0. In Public Domain. Digitization by eGangotri संसारसागरसमुत्तरणैकमंत्रं ब्रह्मादिदेवमुनिपूजित सिद्धमंत्रम्। दारिद्र्यदुःखभयशोकविनाशमंत्रं वंदे महाभयहरं गुरुराजमंत्रम् ॥११५॥ अतः अंतिम स्थिति में सूतजी आह्लादित होकर नैमिषारण्य की धरती पर विराजमान ८८००० ऋषियों को समझाते हैं कि महर्षियो - संसार सागर से पार पाने का सहज साधन बस यही है कि "ब्रह्मा, विष्णु, गणेश, इन्द्र, मुनिजन, ऋषिगण, इत्यादि के द्वारा जो पूजित गुरुराज यन्त्र है इसी को श्रद्धान्वित होकर जपता हुआ, जीवन के दारिद्र, दुःख को समाप्त कर सुख प्राप्त करे और इस भव सागर से मुक्त हो जाय। अंतः हम उन गुरुदेव के चरणों में प्रणाम करते हैं जिनका सानिध्य मात्र ही संसार का भय दूर करता है। ११५ इति श्रीस्कन्दपुराणे उत्तरखण्डे ईश्वरपार्वतीसंवादे श्रीगुरुगीता समाप्ता॥ ॥ श्रीगुरवे नमः । श्रीगुरवे नमः । श्रीगुरवे नमः॥ ऐसा स्कन्द पुराण में गुरुगीता का निरुपण भोलेनाथ पार्वती के संवाद रूप में निरुपित किया गया है। ( 50 ) Prof. Madhav Prasad Lamichhane Collection, Kathmandu, Nepal