श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान
Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा
स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबैठता था कोई कल्पना नहीं आती थी लेकिन अब अमेरिका की सबसे बड़ी संस्था नासा ने उस पुल के चित्र निकाल कर जब सब को दिखाएँ और उसकी कार्बन डेटिंग हुई तो पता चला कि वह पुल 5 लाख 13 साल पुराना है और कुछ 100 वर्ष पुराना है और राम से रावण का युद्ध भी उतना ही पुराना है तो सिद्ध हो गया कि यह पुल उनके समय में बना और श्री राम, विभीषण को कह रहे हैं "देखो मुझे नहीं पता यह पुल कैसे बनाया जाता है? यह नल नील दोनों जानते हैं , नल और नील दोनों कंस्ट्रक्शन के बहुत बड़े इंजीनियर थे जो पुल बनाया वो पत्थरों का पुल समुंदर के बीच में बनाय उसकी कल्पना भी मुश्किल है। समुद्र में पत्थरों को ले जाने के लिए, नाव में पत्थरों को रखना और नाव में किसी तीर को मार कर उसको डुबो देना यह काम वह कर रहे हैं, भगवान श्री राम के साथ पत्थरों को डुबो-डुबो कर फिर एक ऊंचाई तक लाए, फिर कंस्ट्रक्शन हुआ है और उस पुल का कंस्ट्रक्शन पत्थर और पत्थर को जोड़ने वाले चूने के साथ इतना मजबूत बन गया है कि आज तक वह सुरक्षित है 5 लाख 13 साल पुराना पुल सुरक्षित है जो कभी भारत में नल नील ने भगवान श्रीराम के लिए बनाया था और अब अमेरिका के वैज्ञानिक जानते हैं कि भारत का साइंस और टेक्नोलॉजी बहुत ऊंचे स्तर की रही है वरना कैसे संभव है? पत्थरों से समुद्र के बीच में पुल बनाना । नदी के बीच में पुल बनाना तो समझ में आता है, क्योंकि नदी की गहराई निश्चित होती है लेकिन समुंदर की गहराई निश्चित नहीं है कभी कहीं पर 100 किलोमीटर गहरा हो सकता है कभी कहीं 40 किलोमीटर गहरा हो सकता है कभी कहीं 200 किलोमीटर गहरा हो सकता है इतने गहरे समुद्र में पुल बांध दिया और वह पुल के फोटोग्राफ मैंने देखे हैं मेरे पास मेरे कंप्यूटर में वह पड़े हुए हैं बहुत अच्छे से सेव किए हुए हैं, कभी मौका मिला तो प्रोजेक्टर की सहायता से आपको दिखाऊंगा कि कैसे एक पत्थर से दूसरे पत्थर को जोड़ा गया है, उसके अंदर के जो चित्र निकालें हैं पुल के पत्थरों को एक दूसरे से जोड़ा है, बीच में चूना लगाकर । लेकिन पत्थर बिखर ना जाए तो लोहे कील लगी हुई है दोनों तरफ जोड़ों में । यह विज्ञान उस समय था और पुल को जब ऊपर से देखते हैं सेटलाइट से जब देखते हैं , तो सेटलाइट से जो उसके फोटोग्राफ खींचे गए हैं वह शायद दैनिक भास्कर अखबार में तो छप चुके हैं मेरे पास तो उसके ओरिजिनल फोटोग्राफ है और उन फोटोग्राफ को जब हम ऊपर से देखते हैं तो दिखाई देता है कि पुल जेड शेप में बना हुआ है स्टेट लाइन नहीं है, बहुत दिन तक मैं सोचता रहा ऐसी शेप में पुल कैसे बनाया और क्यों बनाया क्या जरूरत थी जैसे आजकल डैम(बाँध) बनाते हैं तो बिल्कुल सीधी लाइन में बनाते हैं, तो शायद भारत की तकनीकी नहीं है सीधी लाइन में पुल बनाया जाए यह यूरोप की टेक्नोलॉजी है । यदि पुल एक सीधी रेखा में होगा तो उस पर पानी का दबाव सबसे ज्यादा पड़ेगा क्योंकि समतल चीज होती है तो उस पर दबाव ज्यादा पड़ता है पानी का दबाव ज्यादा आएगा तो टूट जाएगा । इसलिए 5 लाख 13 साल पहले, नल-नील ने ऐसा पुल बनाया जिस पर पानी का दबाव कम पड़े, उसे एक दूसरे के ऊपर डिस्टीब्यूट कर दे इसलिए उसको जेड शेप दे दी । आजकल के जो जल विज्ञान के वैज्ञानिक है उनसे मैं कहता हूँ जरा ऐसे डिजाइन की कल्पना करो तो वह एक ही शब्द कहते हैं अद्भुत ! वह यह कहते हैं 5 लाख 13 साल पुराने दो व्यक्ति ऐसे हुए जिन्होंने एक कल्पना थी । कि इसका माने कि वे बहुत बड़े वैज्ञानिक रहे होंगे, यह तभी हो