श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान
Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा
स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंऔर सुग्रीव को राजा बनाया था, आपके यहाँ अन्याय तो नहीं है, अधर्म भी नहीं है, क्या बाली का वध न्याय था? तो राम पूछ रहे हैं कि इतने बाद क्यों पूछ रहे हो तुम?
अभी तो सब कहानी खत्म हो गई है, तो वह कह रहे हैं कि अभी तक हिम्मत नहीं पड़ी पूछने की।
तो वो कह रहे हैं सुग्रीव आपका सहयोगी है और उसके सामने मैं अब यह पूछूँ तो मुश्किल हो जाएगी क्या पता आपके और सुग्रीव के बीच में मनभेद हो जाए हमारा लक्ष्य रावण को खत्म करना है वह आपको पहले पूरा करना था इसलिए मैं प्रश्न पूछ रहा हूँ तो राम कहते हैं देखो बाली अधर्मी ही था धर्मी नहीं था।
विभीषण कहते हैं की “कहानी सुनाओ” -
तो सुग्रीव कहता है, “मैं और बाली सगे भाई थे और भाई हर समय मेरा अपमान करता था बारबार मेरी पत्नी का- अपमान करता था, और मेरी पत्नी का अपमान करना इतना ही नहीं राज्यों के विद्वानों की पत्नियों का भी अपमान करता रहता था, रावण के जैसा बनने की कोशिश करता रहता था, जितना ज्यादा शोषण रावण करता था, वैसा ही वह करता था, जब यह सब कहानी सुनते हैं सुग्रीव के मुंह से तब विभीषण कहते हैं बात तो आपकी सही है, बाली अधर्मी में ही था।
राम कहते हैं “मैंने उसको मारने का संकल्प लिया था लेकिन बाली के लिए नहीं सुग्रीव के लिए अगर सुग्रीव को राजा बनाना है तो बाली को हटाना बहुत आवश्यक था, वरना बाली, सुग्रीव को मार डालता और सुग्रीव अगर मर जाता तो हनुमान के रहने का स्थान नहीं रहता और हनुमान तो भगवान के भेजे हुए कोई दूत है, जिनके हाथों बहुत बड़े काम इस देश में होने वाले हैं। आपको मालूम है कि किशकिन्धा राज्य का जो मालिक था बाली उसने हैरान कर दिया था कि इनमें से मैं किसी को नहीं रहने दूंगा ना सुग्रीव को, न हनुमान को, न नल और नील को। यह नल नील भी भगवान के भेजे हुए हैं, इनके हाथों कोई विशेष काम होना है, आप जानते हैं अगर बाली के हाथों यह लोग मरे होते तो भारत में बहुत सारे इतिहास लिखने से वंचित हो जाता यदि हनुमान के विषय में हम यह कल्पना करें कि बाली ने उनको मरवा दिया होता, तो हनुमान का जो सबसे बड़ा चरित्र आता है वह यह कि वह भारत के नागरिकों को भारत की जड़ी बूटियों से परिचित कराने वाले आदि वैद्य थे। क्योंकि श्री राम को पता ही नहीं था, जब लक्ष्मण को अचेत स्थिति आई, तो उन्हें कौन सी जड़ी बूटियां दी जाएगी तो वैद्य सुषेण ने हनुमान जी को समझाया कि हिमालय जाओ और वहां से कुछ जड़ी बूटी ले आओ तो हनुमान जी को लगा इस जड़ी बूटी से काम ना चले तो पूरा पर्वत ही उठा कर ले आए और उन जड़ी बूटियों का परिचय श्री राम को कराया, लक्ष्मण को कराया, और पूरी सेना को कराया ”, तो राम कहते हैं “यह काम वंचित हो जाता। फिर विभीषण ने नल नील के विषय में पूछा तब श्री राम कहते हैं “नल-नील तो अन्दुत है, इन्होंने सेना को रावण के राज्य में भेजने के लिए पुल बनाया”। अब तक तो सब हम यह मानते थे कि रामचंद्र जी की सेना जो रावण के राज्य में पहुंची उसके लिए कोई पुल बना तो बना होगा हमारे दिमाग में नहीं