श्री राम कथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान
Shri Ram Katha Mein Bharat Ki Sabhi Samasyaon Ka Samadhan
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना द्वारा
स्रोत: Rashtraniti & Ram Katha Discourse · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसकता है, साधारण लोगों के दिमाग में कल्पना कभी नहीं आ सकती कि पानी के प्रेशर को बराबर डिसेटीब्यूट करना है और उसमें जेड शेप को देना है ,ताकि वह ज्यादा दिन सुरक्षित रहे पहले जब हम चर्चा करते थे तो कुछ आधुनिक पढ़े लिखे लोगों से सुना है कि भारत बहुत महान था ” सुना है, लेकिन इसकी महानता क्या थी? यह अब दिखाई देती है 5 लाख 13 साल पहले इस तरीके के पुल का डिजाइन कर देना और इतने साल तक टिके रहना और इसके बीच में कहीं भी टूट-फूट नहीं, क्रैक नहीं है अब वह तो भला हो दक्षिण भारत के जयललिता का जिसने जिद पकड़ ली थी कि इस पुल को तोड़ ही देना है, क्योंकि यह चेन्नई के रास्ते में आने वाले बड़े जहाजों को रोककर ,जहाजों के लिए बाधा डालता है अच्छा हुआ जयललिता अपने पद से निकल गई इसलिए पुल बच गया वरना वह तोड़ने की तैयारी में थी, तो नेता कैसे हैं हमारे? इस से अंदाजा लगा लो और राम के जमाने में कितनी मेहनत से बना होगा उसका अंदाजा लगा लो इस तरह की कालिटी और इस तरह के के काम और अब समझ में आता है कि जब पुल सत्य था तो सब कुछ सत्य रहा होगा अब तक हमारे देश में कुछ ऐसे ही इतिहासकार हो गये, जो वामपंथी हैं, वह मानते ही नहीं हैं कि भगवान राम की कहानी सत्य है वे कहते हैं हाइपोथिसिस हैं , हाइपोथिसिस माने कल्पना में गढ़ी हुई बातें, और अभी यह जो पुल का हो जाना और उसी समय का हो जाना जो राम का समय है तो यह सिद्ध कर देता है कि यह सत्य है इसमें काल्पनिक कुछ नहीं है और अगर इसी विषय पर आगे हम खोज करें तो बहुत कुछ ऐसा निकल आएगा क्योंकि वैज्ञानिकों ने अभी यह माना है यह पुल जो नीचे गया है इसके साथ पूरी सभ्यता नीचे गई होगी और यह पुल अकेला ही नीचे नहीं गया होगा हो सकता है लंका भी नीचे चली गई हो उसके साथ मिलकर । द्वारिका के बारे में तो वैज्ञानिकों ने सिद्ध कर दिया है कि द्वारिका तो पूरी समुंदर में समा गई थी जो अभी भी मिलती है समुंदर के नीचे । तो हो सकता है लंका भी चली गई हो, क्योंकि सुनामी आने से पहले मेरी भी कल्पना काम नहीं करती थी, कि यह नीचे गई कैसे होगी लेकिन सुनामी पर मैंने अपनी आंखों से देखा है कि 20 -20 मंजिला बिल्डिंग नीचे चली गई तो यह भी चला गया होगा और पता नहीं पिछले कितने लाख वर्षों में कितनी बार सुनामी आई है, कोई कैलकुलेशन नहीं है । अब डूबी हुई सभ्यता पर कोई काम करें कोई करोड़ों का बजट निकले तो और भी बहुत कुछ निकल आएगा क्योंकि यह पुल अकेले में नहीं है, इस पुल की बहुत विशेषता है नल और नील को राम पूछ रहे है कंब रामायण में, “कि तुम ने पुल निर्माण की जोड़ी बनाई है उसकी डिजाइन दिखाओ” नल-नील – “जो हमने डिजाइन बनाई है वह आपको हम जरूर स्पष्ट करेंगे” तो वह कह रहे हैं “इस पर से अपनी सेना तो जाएगी लेकिन दुश्मन की सेना इधर नहीं आ पाएगी ऐसा डिजाइन हमने बनाया है अपनी सेना तो जाएगी लेकिन दुश्मन की सेना इधर नहीं आ पाएगी” । तो राम पूछ रहे हैं कि “इसमें ऐसी क्या विशेषता है कि दुश्मन की सेना इधर नहीं आ पाएगी तो नलनील- कहते हैं कि अपनी सेना में ज्यादातर बंदर है और बंदर में वजन में बहुत हल्के होते हैं और इनके शरीर का सारा वजन पैरों में नहीं आता है चार पैरों में आता है वह डिसेटीब्यूट हो जाता है इसलिए इनका जाना तो आसान है और रावण की सेना में सब दो पैरों वाले हैं, हमारी सेना में सब चार पैर वाले हैं तो यह जो चार पैर वाले हैं इनका चलना बहुत आसान है, यह दो पैर वाले आए तो यह पुल