श्रीरामचरितमानस
Shri Ramcharitmanas
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 820, कुल 1058 में से
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- रामचरितमानस *
पुनि कृपाल हँसि चाप चढ़ावा । पावक सायक सपदि चलावा ॥ भयउ प्रकास कतहुँ तम नाही । ग्यान उदयँ जिमि संसय जाहीं ॥
फिर कृपालु श्रीरामजीने हँसकर धनुष चढ़ाया और तुरंत ही अग्निबाण चलाया, जिससे प्रकाश हो गया, कहीं अँधेरा नहीं रह गया। जैसे ज्ञानके उदय होनेपर [सब प्रकारके] सन्देह दूर हो जाते हैं ॥ २ ॥
भालु बलीमुख पाड़ प्रकासा । धाए हरष बिगत श्रम त्रासा ॥ हनुमान अंगद रन गाजे । हाँक सुनत रजनीचर भाजे ॥
भालू और वानर प्रकाश पाकर श्रम और भयसे रहित तथा प्रसन्न होकर दौड़े। हनुमान् और अङ्गद रणमें गरज उठे। उनकी हाँक सुनते ही राक्षस भाग छूटे ॥ ३ ॥
भागत भट पटकहिं धरि धरनी । करहिं भालु कपि अद्भुत करनी ॥ गहि पद डारहिं सागर माहीं । मकर उरग झष धरि धरि खाहीं ॥
भागते हुए राक्षस योद्धाओंको वानर और भालू पकड़कर पृथ्वीपर दे मारते हैं। और अद्भुत (आश्चर्यजनक) करनी करते हैं (युद्धकौशल दिखलाते हैं)। पैर पकड़कर उन्हें समुद्रमें डाल देते हैं। वहाँ मगर, साँप और मच्छ उन्हें पकड़-पकड़कर खा डालते हैं ॥ ४ ॥
दो०—कछु मारे कछु घायल कछु गढ़ चढ़े पराइ।
गर्जहिं भालु बलीमुख रिपु दल बल बिचलाइ ॥ ४७ ॥
कुछ मारे गये, कुछ घायल हुए, कुछ भागकर गढ़पर चढ़ गये। अपने बलसे शत्रुदलको विचलित करके रीछ और वानर [वीर] गरज रहे हैं ॥ ४७ ॥
निसा जानि कपि चारिउ अनी । आए जहाँ कोसला धनी ॥ राम कृपा करि चितवा सबही । भए बिगतश्रम बानर तबही ॥
रात हुई जानकर वानरोंकी चारों सेनाएँ (टुकड़ियाँ) वहाँ आयीं जहाँ कोसलपति श्रीरामजी थे। श्रीरामजीने ज्यों ही सबको कृपा करके देखा त्यों ही ये वानर श्रमरहित हो गये ॥ १ ॥
उहाँ दसानन सचिव हँकारे । सब सन कहेसि सुभट जे मारे ॥ आधा कटकु कपिन्ह संधारा । कहहु बेगि का करिअ बिचारा ॥
वहाँ [लङ्कामें] रावणने मन्त्रियोंको बुलाया और जो योद्धा मारे गये थे उन सबको सबसे बताया। [उसने कहा—] वानरोंने आधी सेनाका संहार कर दिया! अब शीघ्र बताओ, क्या विचार (उपाय) करना चाहिये? ॥ २ ॥