श्रीरामचरितमानस
Shri Ramcharitmanas
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 972, कुल 1058 में से
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- रामचरितमानस *
पुनि लछिमन उपदेस अनूपा । सूपनखा जिमि कीन्हि कुरूपा ॥ खर दूषन बध बहुरि बखाना । जिमि सब मरमु दसानन जाना ॥
और फिर जैसे लक्ष्मणजीको अनुपम उपदेश दिया और शूर्पणखाको कुरूप किया, वह सब वर्णन किया। फिर खर-दूषण-बध और जिस प्रकार रावणने सब समाचार जाना, वह बखानकर कहा, ॥ २ ॥
दसकंधर मारीच बतकही । जेहि बिधि भई सो सब तेहिं कही ॥ पुनि माया सीता कर हरना । श्रीरघुबीर बिरह कछु बरना ॥
तथा जिस प्रकार रावण और मारीचकी बातचीत हुई, वह सब उन्होंने कही। फिर मायासीताका हरण और श्रीरघुवीरके विरहका कुछ वर्णन किया ॥ ३ ॥
पुनि प्रभु गीध क्रिया जिमि कीन्ही । बधि कबंध सबरिहि गति दीन्ही ॥ बहुरि बिरह बरनत रघुबीरा । जेहि बिधि गए सरोबर तीरा ॥
फिर प्रभुने गिद्ध जटायुकी जिस प्रकार क्रिया की, कबन्धका बध करके शबरीको परमगति दी और फिर जिस प्रकार विरह-वर्णन करते हुए श्रीरघुवीरजी पंपासरके तीरपर गये, वह सब कहा ॥ ४ ॥
दो०—प्रभु नारद संवाद कहि मारुति मिलन प्रसंग ।
पुनि सुग्रीव मितार्ई बालि प्रान कर भंग ॥ ६६ ( क ) ॥
प्रभु और नारदजीका संवाद और मारुतिके मिलनेका प्रसंग कहकर फिर सुग्रीवसे मित्रता और बालिके प्राणनाशका वर्णन किया ॥ ६६ ( क ) ॥
कपिहि तिलक करि प्रभु कृत सैल प्रबरषन बास ।
बरनन वर्षा सरद अरु राम रोष कपि त्रास ॥ ६६ ( ख ) ॥
सुग्रीवका राजतिलक करके प्रभुने प्रवर्षण पर्वतपर निवास किया, वह तथा वर्षा और शरद्का वर्णन, श्रीरामजीका सुग्रीवपर रोष और सुग्रीवका भय आदि प्रसंग कहे ॥ ६६ ( ख ) ॥
जेहि बिधि कपिपति कीस पठाए । सीता खोज सकल दिसि धाए ॥ बिबर प्रबेस कीन्ह जेहि भाँती । कपिन्ह बहोरि मिला संपाती ॥
जिस प्रकार वानरराज सुग्रीवने वानरोंको भेजा और वे सीताजीकी खोजमें जिस प्रकार सब दिशाओंमें गये, जिस प्रकार उन्होंने बिलमें प्रवेश किया और फिर जैसे वानरोंको सम्पाती मिला, वह कथा कही ॥ १ ॥
सुनि सब कथा समीरकुमारा । नाघत भयउ पयोधि अपारा ॥ लंकाँ कपि प्रबेस जिमि कीन्हा । पुनि सीतहि धीरजु जिमि दीन्हा ॥