भारतकोश
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

DevanagariHindipublished2,621 पृष्ठ

पृष्ठ 72, कुल 2621 में से

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पृष्ठ 72

इस मन्त्रसे सुग्रीवकी पूजाकर—चाहे तो इसी श्लोकसे किष्किन्धाकाण्डका सम्पुटित पाठ करे।

सुन्दरकाण्डका विनियोग एवं ऋष्यादिन्यास

ॐ अस्य श्रीमत्सुन्दरकाण्डमहामन्त्रस्य भगवान् हनुमान् ऋषिः। अनुष्टुप् छन्दः। श्रीजगन्माता सीता देवता। श्रीं बीजम्। स्वाहा शक्तिः। सीतायै कीलकम्। सीताप्रसादसिद्धार्थं सुन्दरकाण्डपारायणे विनियोगः। ॐ भगवद्धनुमदृषये नमः शिरसि। अनुष्टुप्च्छन्दसे नमः मुखे। श्रीजगन्मातृसीतादेवतायै नमः हृदि। श्रीं बीजाय नमः गुह्ये। स्वाहा शक्तये नमः पादयोः। सीतायै कीलकाय नमः सर्वाङ्गे।

करन्यास

ॐ सीतायै अङ्गुष्ठाभ्यां नमः। ॐ विदेहराजसुतायै तर्जनीभ्यां नमः। रामसुन्दर्यै मध्यमाभ्यां नमः। हनुमता समाश्रितायै अनामिकाभ्यां नमः। ॐ भूमिसुतायै कनिष्ठिकाभ्यां नमः। ॐ शरणं भजे करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।

फिर इन्हीं मन्त्रोंसे हृदयादिन्यास करके इस प्रकार ध्यान करे—

सीतामुदारचरितां विधिसाम्बविष्णुवन्द्यां त्रिलोकजननीं शतकल्पवल्लीम्।
हेमैरनेकमणिरञ्जितकोटिभागैर्भूषाचयैरनुदिनं सहितां नमामि॥

सुन्दरकाण्डके पाठकी विशेष विधि है कि प्रतिदिन एकोत्तरवृत्तिसे क्रमशः एक-एक सर्ग पाठ बढ़ाते हुए ग्यारहवें दिन पाठ समाप्त कर दे। १२ वें दिन अवशिष्ट दो सर्गके साथ आरम्भके १० सर्ग पढ़े जायँ, १३ वें दिन ११ से २३ तक इस तरह तीन आवृत्तिके पाठसे समस्त कार्यकी सिद्धि होती है। दूसरा क्रम है—प्रतिदिन ५ अध्याय पाठका। इसमें भी पूर्वकी भाँति १४ वें दिन अन्तके ३ तथा प्रारम्भके दो सर्गका पाठ करे। सम्पुट पाठका मन्त्र है—
“श्रीसीतायै नमः।'*

लङ्काकाण्डका विनियोग एवं ऋष्यादिन्यास

ॐ अस्य श्रीयुद्धकाण्डमहामन्त्रस्य विभीषण ऋषिः। अनुष्टुप्च्छन्दः। विधाता देवता। बं बीजम्। नमः शक्तिः। विधातेति कीलकम्। श्रीधातृप्रसादसिद्धार्थे युद्धकाण्डपारायणे विनियोगः। ॐ विभीषणऋषये नमः शिरसि। ॐ अनुष्टुप्च्छन्दसे नमः मुखे। ॐ विधातृदेवतायै नमः हृदि। ॐ बं बीजाय नमः गुह्ये। ॐ नमः शक्तये नमः पादयोः। ॐ विधातेति कीलकाय नमः सर्वाङ्गे।

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