शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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इतना ही नहीं, उसे इनकी फ़रमायशों भी पूरी करनी पड़ती है। उनके पूरा करनेमें उसे बड़ी-बड़ी ज़िल्लतें उठानी होती हैं। सामने रहने पर ये इस तरह नाच नचातीं और नाना प्रकारके कष्ट देती हैं। आँखों की ओफ़ल रहने पर भी, ख़ैर नहीं। इनकी जादू-भरी आँखोंसे उन्मत्त हुआ पुरुष, इनकी वियोगाश्रमिमें, बुरी तरह तड़प-तड़प कर भस्म होता है। बहुत लिखनेसे क्या—इनकी रसीली, मदमाती और नशीली आँखोंके मारे हुए को किसी अवस्थामें भी, सुख-शान्ति नहीं मिलती। कविने ठीक ही कहा है कि, इन नाज़नियोंके चञ्चल नेत्र जिसके हृदयमें प्रवेश कर जाते हैं, उसकी ख़ैर नहीं।
खूबसूरत औरतें जिन पर अपनी निगाहके तेज़ तीर चलाती या कटाक्ष-वाण मारती हैं, वे अपनी होशियारी और चतुराईको ताक पर रखकर पूरे पागल हो जाते हैं—कितनेही तो मजनू बनकर कपड़े फाड़ने लगते हैं। देखिये, एक आशिक़ किसी हसीनके नयनवाणसे घायल होकर क्या कहता है :—
Wदिलचस्प है, आफ़त है, क़यामत है, ग़ज़ब है।
चात उनकी, अदा उनकी, क़द उनकी, चाल उनकी ॥—अक़बर।
उनकी बातें दिलचस्प हैं, उनकी अदाएँ आफ़त हैं, उनका क़द क़यामत बर्पा करनेवाला और चाल ग़ज़ब ढाहनेवाली है। मतलब यह कि, हम उनकी मीठी-मीठी बातों, अदाओं और चाल चौरः पर भर मिटे।