भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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अगर हमें प्रेमका परिणाम मालूम होता, तो हम कभी भूलकर भी प्रेमका नाम न लेते।

बुरी है ऐ दाग ! राहें उलफ़्त, खुदा न ले जाय ऐसे रस्ते। जो तुम अपनी खैर चाहते हो, तो भूलकर दिल्ली न करना ॥ दाग।

ऐ दाग ! प्रेमका पन्थ देढ़ा है। परमेश्वर किसीको इस राहसे न ले जाय। अगर तुम अपना भला चाहते हो, तो भूल कर भी इस राहमें कदम न धरना।

देख ऐ दिल ! न छेड़ किसी-ये जुल्फ़। कि ये हैं, पेचो ताबकी बातें ॥ जौक।

ऐ दिल ! उसकी जुल्फ़ोंके किस्से न छेड़, क्योंकि ये बातें बड़ी पेचीली हैं। इनमें पड़ना ठीक नहीं।

किताबें मुहब्बतमें ऐ हज़रते दिल ! बताओ कि तुम लेते कितना सबक हो ॥ कि जब आनकर तुमको देखा, तो वह ही। लिये दस्ते अफ़सोसके दो वरक हो ॥ जौक।

ऐ हज़रत दिल ! मुहब्बतकी किताबमें तुम कितना सबक लेते हो ? हमने तो तुमको जब आकर देखा, तभी तुम्हारे हाथमें शोक-दुःखके दो वरक देखे।

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