भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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( १०१ )

श्री हलाहल मद भरे, श्वेतश्याम रतनार ।

जियत मरत मुक्ति-मुक्ति परत, जेहि चित्तवत इकबार ॥

उसकी सफेद श्याम और रतनारी आँखोंमें अमृत है, हलाहल विष है और मद है ; तभी तो वह जिसकी तरफ एक बार देख लेती है,—वह जीता है, मरता है और झुक-झुक पड़ता है ।

प्रेमरसन महोदय कहते हैं—Beauty is the pilot of the young soul. अर्थात् सौन्दर्य नवयुवकोंका पथ-प्रदर्शक है । जहाज़का मार्गी जिस तरह जहाज़को राह दिखाता है, जहाँ चाहता है वहाँ ले जाता है ; उसी तरह खूबसूरती जवानोंको जहाँ चाहती है ले जाती है । सारोंश यह कि, उठती जवानीके पढ़े सुन्दरियोंसे आँख मिलाते ही उनके गुलाम हो जाते हैं । स्त्रियाँ जो चाहती हैं वही करते हैं, उनकी दिखाई राह पर चलते हैं और उनकी मरजीके खिलाफ कोई काम कर नहीं सकते । नौजवान दुनियादार इनके जालमें फँसते हैं, इसमें तो कोई अचम्भेकी बात ही नहीं । वे पहुँचे हुए चूड़ तपस्वी जो हवा और पानी मात्र पर जिन्दगी बसर करते हैं, हर क्षण जगदीशका नाम रटा करते हैं, ख्वाबमें भी कामिनीका दर्शन नहीं करते और दर्शन करने पर भी उनके दाममें न फँसनेका पक्के-से-पक्का इरादा रखते हैं, उनको देखते ही, उनसे चार आँखें होते ही, उनके गुलाम हो जाते और होगये हैं । विश्वामित्र, पराशर और श्रृंगी ऋषिको इन शब्दोंमें न सही—दूसरे शब्दोंमें अपनी-अपनी माशूकाओंसे .क्रीब-क्रीब यही कहना पड़ा होगा :—