शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
पृष्ठ 129, कुल 544 में से
संदर्भ में पढ़ें( १०८ )
24. If there be on the head a garland of Malti flowers which are about to blossom, if sandal mixed with saffron is besmeared on the body and the beloved beautiful lady is embraced on the bosom, then I take this as the pleasure of heaven.
—❧—
प्राङ्मायेति मनागमानितगुणां जाताभिलाषं ततः सवीरं तदनु शलथोद्यतमवृषत्यस्तथैवं पुनः ॥ प्रेमाद्रैःपृथ्वाणीयनिर्भरहः क्रीडाप्रगल्भंतो निःशंकांगविकर्षणादिकसुखं रम्यं कुलस्वीरतम् ॥२५॥
पहले-पहल तो “न न” कहती* है। इसके बाद थोड़ी-थोड़ी अभिलाषा करती है। इसके पीछे लजाती हुई अंगोंको ढीला कर देती है और फिर अवीर हो, प्रेमके रसमें शराबेर हो जाती है। इसके भी पीछे; एकान्त क्रीडाकी इच्छा करती है और भोग-विलासमें तरह-तरहकी चातुरी दिखाती हुई, निःशंक होकर मर्दन चुम्बनादिसे असाधारण सुख देती है। ये सब मनोहर गुण कुलबालाओंमें ही होते हैं; इसलिये कुलकामिनियोंके साथ ही रमण करना चाहिये ॥२५॥
❧ जीन पाल महोदय कहते हैं—Women are shy of nothing so much as the little word “Yes” at least they say it only after they have said “No,” स्त्रियोंको “हाँ” कहनेमें जितनी लज्जा मालूम होती है, उतनी और किसी दूसरी बातमें नहीं। वे कम-से-कम “नहीं” कह चुकने पर ही “हाँ” कहते हैं।