शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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26. Fortunate must be the man who enjoys the honey of the lips of a lady who is lying on his bosom, whose scented hairs are unfastened, whose eyes are half-shut and whose cheeks shine with drops of perspiration after the exertion of sexual intercourse.
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आर्षाजितनयनानां यः सुरतरसोऽखुसविदं कुरुते ॥
मिथैनैर्मिथोवधारितमवितथमिदमेवकामनिर्वहणम् ॥२७॥
आलस्यपूर्ण नेत्रोंवाली स्त्रियोंकी कामसे तृप्ति करना, स्त्री-पुरुष दोनोंका परस्पर कामपूजन है, जिसको काम-क्रीड़ा करनेवाले दोनों स्त्री-पुरुष ही जानते हैं ॥२७॥
खुलासा-काम-मदकी अधिकताके कारण जिन स्त्रियोंकी आँखोंमें आलस्य भरा है, इसलिये वे ज़रा-ज़रा खुल रही हैं—ऐसी स्त्रियोंकी कामसे तृप्ति करना पुरुषका परम पुरुषार्थ है। ऐसी स्त्रीके साथ सम्भोग करनेमें जो सुख मिलता है, उस सुख की तुलना नहीं। उस सुखका हाल काम-क्रीड़ा करनेवाले दोनों स्त्री-पुरुष ही जानते हैं।
स्त्रीके नेत्रोंका भारी सा हो जाना, आधे नेत्रोंका खुला रहना और आधे नेत्रोंका बन्द रहना—स्त्रीके पूर्णतया कामोन्मत्त होनेके चिह्न है। यह समय और अवस्था ही काम-क्रीड़ाके लिये उचित है। ऐसी कामोन्मत्त नारीको जो चतुर पुरुष भोगता और सन्तुष्ट करता है, वह भाग्यवान् है और स्त्री भी ऐसे पुरुषकी दासी हो जाती है। अगर स्त्री अपने-आप ऐसी कामोन्मत्ता
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