भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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नहीं होती, तो कोक-कलाविद चतुर रसिक पुरुष बुभुषन-मर्दन आदि तरकीबोंसे उसे काम-मदसे मतवाली कर लेते हैं।

दोहा ।

मृगनैनी थालस भरी, सुरत सेज सुख साज ।

पूजहिं दम्यति काम मिल, करहिं सुमंगल काज ॥२७॥

27. The pleasure arising out of sexual intercourse with a lady with her eyes partly closed is known to both man and woman as the result of mutual intercourse and is their duty.

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इदमनुचितमकमश्च पुंसां

यदिह जरास्वपि मान्मथा विकाराः ॥

यदपि च न कृतं नितिबिनीनां

स्तनपतनावधि जीवितं रतं वा ॥२८॥

विद्याताने दो बातें बड़ी ही अनुचित की हैं :—( १ ) पुरुषोंमें, अत्यन्त बुढ़ापा होने पर भी, काम-विकारका होना ; ( २ ) स्त्रियोंका स्तन गिर जाने पर भी जीवित रहना और काम-चेष्टा करना । ॥२८॥

खुलासा—ब्रह्माको उचित था कि, वह बूढ़ोंमें काम-विकार न प्रकट होने देता और स्त्रियोंको तभी तक जीवित रखता, जब तक कि उनके कुच-गुगल सुन्दर सघन और कठोर रहते । बुढ़ापे में काम-विकार का प्रकट होना और स्तनोंके सुकड़ जाने, गिर