शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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जवानीमें और स्त्रीके कुचोंके कठोर और
सघन बने रहने तक ही है ।
28. It is very improper and contradictory that males are subject to passions in old age and it is also very improper and contradictory that females were not made to live and to have sexual intercourse only up to the time when their breasts are protuberant.
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एतत्कामफलं लोके यद्वयोरैकचित्ता ।।
अन्यचित्तत्वे कामे शवयोरिव संगमः ॥२६॥
समागमके समय स्त्री-पुरुषोंका एकचित्त हो जाना ही कामका फल है । यदि समागममें दोनोंका चित्त एक न हो, तो वह समागम—गम नहीं ; वह तो मृतकोंका सा समागम है ॥२६॥
किस्तीने कहा है :—
सुरते च समाधौ च, मनो यत्र न लीयते ।
ध्यानेनापि हि किं तेन, किं तेन सुरतेनवा ॥
सुरतके समय सुरतमें और समाधिके समय समाधिमें यदि मन लीन न हो जाय, चित्त उन्हीं कामोंमें गर्क न हो जाय, तो उस सुरत और समाधिसे कोई लाभ नहीं । स्त्री-पुरुषके समागमके समय, दोनोंका एक दिल हो जाना परमाविश्यक है । दोनों का दिल एक हुए बिना कुछ आनन्द नहीं । यदि एकका दिल