भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

Devanagarihipublished544 पृष्ठ

पृष्ठ 172, कुल 544 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 172

( १४५ )

सोरठा ।

फूलें चहुँ दिशि आम, भई सुगन्धित ठौर सब ।

मधु मधुषी अलिग्राम, मत्त भये भूमत फिरें ॥३७॥

सार---बसन्तमें प्रायः सभी प्राणियोंको कामदेव सताता है ।

37. Who does not feel buoyant in the spring season when all the quarters are filled with smell issuing forth from the bunch of mango-blossoms and when the bees are busy in the collection of sweet honey from flowers ?

—*—

ग्रीष्म-महिमा ।

अच्छाच्छवन्दनरसाद्रिकरा मुगाच्यो

वारागृहाणि कुसुमानि च कौमुदी च ॥

मन्दो मरुत्तुमनसः शुचि हर्म्यपृष्ठं

ग्रीष्मे मद्गुच्छ मद्गुच्छ विवर्द्धयन्ति ॥ ३८ ॥

अत्यन्त सफेद चन्दन जिनके हाथोंमें लग रहा है, ऐसी भुगतथनी सुन्दरियाँ, फव्वारेदार घर, फूल, चाँदनी, मन्दी हवा और

१०

शृंगार शतक · पृष्ठ 172, कुल 544 में से · BharatKosha