शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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इतनी होती है कि, अपनी एक मुसक्यानमें ही पुरुषका मन हर लेती है। पर ये सब सुख तभी मिलते हैं, जब कि स्त्री सती-साध्वी और सच्ची पतिव्रता होती है। यही स्त्री अगर कुलट्ठा-व्यभिचारिणी अथवा कर्कशा होती है; तो पुरुषके लिये यहीं-इसी लोकमें—साक्षात् नरक हो जाता है। पर सच्ची पतिव्रता किसी विरले ही पुण्यात्मा को मिलती है।
जिसे पतिव्रता स्त्री मिलती है, उसे दुःख-दैन्य, आपद्-मुसीबत और शोक-चिन्ता प्रभृति सता नहीं सकते; क्योंकि पतिव्रता नरकको स्वर्गमें, दुःखको सुखमें, विपद्को सम्पदमें और शोकको हर्षमें परिणत कर देनेकी क्षमता रखती है। वह घरके काम-काज करती, पुत्र-कन्याओंको पालती, उन्हें सुशिक्षा देती और कुपथगामी पतिको सुपथगामी बना देती है। पुरुषकी कड़ी कमाई का पैसा बड़ी ही किफायतसे खर्च करती और उसे नष्ट होनेसे बचाती तथा पतिका शोक हर लेती है। स्त्रियोंके सम्बन्धमें गोल्डस्मिथ महोदयने, जो ईंग्लैण्डके एक नामी विद्वान् थे, खूब कहा है। हम अपने पाठकोंके ज्ञानवर्द्धनार्थ आपके अनमोल वचन नीचे देते हैं:—“Women, it has been observed, are not naturally formed for great cares themselves, but to soften ours” यह देखा गया है, कि स्त्रियाँ भ्रष्ट चिन्ताओंको खय सहनेके लिये नहीं; वरन् हमारी चिन्ताओंको घटानेके लिये बनाई गई हैं। आपने एक जगह लिखा है:—“She who makes her husband and her