शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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children happy, who reclaims the one from vice and trains up the other to virtue, is a much greater character than ladies described in romance, whose whole occupation is to murder mankind with shaft from their quiver or their eyes.” जो अपने पति और बच्चोंको सुखी कर सकती है, जो अपने ख़विन्दको कुमार्गसे हटाकर सुमार्ग पर चला सकती है, जो अपने बालकों को सदगुणोंकी शिक्षा दे सकती है, वह कल्पित कथाओं या उपन्यासोंमें वर्णित उन स्त्रियोंसे अच्छी है, जो अपने तरकश या नेत्रोंके वाणों द्वारा मानवजातिको बध करना ही अपना कर्तव्य समझती है।
संसारमें रूपका आदर है। रूप प्राणिमात्रको अपनी ओर खींचता है, पर रूपसे गुणकी पूजा अधिक होती है। रूप नेत्रेन्द्रियको प्रसन्न करता है; पर गुण आत्मा पर अधिकार जमाता है। पोप महाशय कहते हैं—“Beauties in vain their pretty eyes may roll, charms strike the sight but merit wins the the soul.” सुन्दरियाँ वृथा ही अपने सुन्दर नेत्रोंको इधर-उधर चलाती हैं। सौन्दर्यका प्रभाव नेत्रोंपर पड़ता है, किन्तु गुण आत्माको जीत लेता है। मतलब यह, कि रूपवती और गुणवती रमणी कहीं भली होती है; पर जिसे ईश्वरने ऐसी नारी दी है, जिसमें रूपके साथ सुन्दर गुणोंका भी समावेश है, वह निश्चय ही पूर्व जन्मका तपस्वी