शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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it. सुन्दर पदार्थमें मनुष्यमात्रकी दृष्टिको आकर्षित करने की इतनी प्रबल शक्ति है कि, कोई भी मनुष्य उससे प्रसन्न हुए बिना रह नहीं सकता। सुन्दरता मनुष्यके दिमागमें चढ़ जाती और उसे नशेसे मस्त कर देती है। देखनेवालेका दिल वशमें नहीं रहता। जिम्मेरमैन महोदयने ठीक ही कहा है—“Beauty is worse than wine ; it intoxicates both holder and the beholder. “सौन्दर्य शराबसे भी बुरा है। यह उसके रखनेवाले और उसके देखनेवाले दोनोंको मतवाला कर देता है। सुन्दरियोंके सौन्दर्यको देखकर, मन और इन्द्रियोंको वशमें रखनेके पूर्ण अभ्यासी भी, अपने मनको वशमें रखनेमें असमर्थ होते हैं। पुराणोंमें लिखा है कि, पूर्वकालमें, मरीचि, शृंगी, विश्वामित्र और पराशर जैसे महामुनि, जो केवल वृक्षोंके पत्ते और हवा भक्षण करके जीते थे, इन मोहिनियोंको सामने पाकर इन्हें त्याग न सके ; तब साधारण लोगोंकी क्या गिन्ती ? शैक्सपियरने कहा है :—“Beauty is a witch against whose charms faith melteth into blood.” सुन्दरता ऐसी जादूगरनी है कि उसके जादूसे धर्म-ईमान गल कर धून हो जाते हैं; यानी रुपये सामने धर्म-ईमान नहीं ठहरता, न जाने कहाँ काफूर हो जाता है ?
कुण्डलिया ।
परिडत-जन जब कहत हैं, तिय तजिबेकी बात । करत वृथा बकवाद वह, तजी नैक नहीं जात ॥