शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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योग्य नहीं ; वे बुथा निन्दा करते हैं। आप स्वर्गमें जाकर स्त्री ही भोगेंगे और करेंगे क्या ? स्वर्गीय अप्सरायें या हरे भी तो आखिर स्त्रियाँ ही हैं न ? ऐसे धोखेबाज़ोंकी बातोंमें न आना चाहिये।
उस्ताद जौकने भी कहा है :—
रेसो सफेद शैल्यमें, है जुस्मते फ़रेब ।
इस मक़ाँदनीपर, न करना गुमान ऐ सुवह ॥
शैखजी की सफेद दाढ़ीमें कपटका अन्धकार छिपा हुआ है। इस भूटी चाँदनी पर प्रातःकालकी सफेदीका धोखा मत खाना ; यानी इनकी बात मान, कामिनियोंको भोगना न छोड़ना। ऐसे घोंघा-बसन्त अपनी सिद्धाई जमानेको कपट से ऐसी बेतुकी बातें कहते हैं और कुछ ऐसे भी होते हैं, जिनको इन नारी-रत्नोंकी क़द्र ही नहीं मालूम ; इससे इनकी निन्दा करते हैं। जिसे जिसकी क़द्र ही नहीं मालूम, वह तो उसकी निन्दा ही करेगा। जंगलमें पड़े हुए गजमेतियोंको भीलनी पाकर भी फँक देती है ; पर उनकी कीमत जाननेवाला जौहरी उन्हें उठा कर छातीसे लगा लेता है। जिसने शराब नहीं पीयी, जिसे शराब का मज़ा नहीं मालूम, वह शराबकी निन्दा ही करता है। उसे कोई लाब समझावे, वह नहीं समझता। ऐसे ही मौक़ेका एक शेर महाकवि दागने कहा है :—