भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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( १६४ )

याज्ञोय धीरश्च शमस्तुको वा ?।

यातो न मोहं ललनाकटाक्षैः ॥

संसारमें सबसे बड़ा शूरवीर कौन है ? सबसे बड़ा शूरवीर वही है, जो कामदेवके वाणोंसे पीड़ित न हो। बुद्धिमान, धीर और समदर्शी कौन हैं ? जो स्त्रीके कटाक्षसे मोहित न हो।

हमें एक “सर्वजीत” नामक राजाकी कथा याद आ गई है। उसे हम अपने पाठकोंके मनोरञ्जनार्थ नीचे लिखते हैं। पाठक उसे कोरे मनोरञ्जनका ही मसाला न समझें, बल्कि सच्चे सर्वजीत बननेकी चेष्टा करें :—

सर्वजीत राजा ।

एक राजाने सारी पृथ्वीको जीतकर अपना नाम “सर्वजीत” रक्खा। सब देशोंकी रैयत और उसके मातहत राजा-महाराजा उसे “सर्वजीत” कहने लगे ; लेकिन स्वयं राजमाता—राजाकी जननी—उसे “सर्वजीत” न कह कर, उसे उसके पुराने नामसे ही पुकारती।

एक दिन राजाने अपनी माँ से कहा—“माता जी ! सारा संसार मुझे ‘सर्वजीत’ कहता है, पर आप मुझे मेरे पुराने नाम से ही क्यों पुकारती हो ?” राजमाताने कहा—“बेटा ! बाहरके देशोंके जीतनेसे कोई “सर्वजीत” नहीं हो सकता। तुने सारा संसार जीत लिया, पर अपना शरीर, मन और इन्द्रियाँ तो जीती