शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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बड़े-बड़े बलवन्त वीर, सब तिनके आगे । महाबली ये काम, जाहि देखत सब भागे ॥ अभिमान भरे या मदनको, मान मार मेटे अविधि । नर धरम-धुरन्धर वीर हैं, विले या संसार-मधि ॥५८॥
सार—शूरवीर इस जगत्में बहुत हैं ; पर कामिनियोंके कटाक्ष-वाणोंसे घायल न होने- वाला सच्चा शूरवीर शायद ही कोई एक हो ।
58. There are many a hero on this earth who can tear the head of a mad elephant and there are also many powerful enough to kill a fearful lion but I can challenge all the strong men and say that there are few who can fully control the excitements of passions.
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सन्मार्गे तावदान्ते प्रभवति स नरस्तावदेवेन्द्रियाणां लज्जां तावद्विधते विनयमपि समालम्बते तावदेव ॥ भूवापाकृष्टमुक्ताः श्रवणपथगता नीलपञ्चमाण एते यावल्लीलावतीनां हृदि न धृतिमुषो दृष्टिवाणाः पतन्ति ॥५९॥
पुरुष सन्मार्गमें तभीतक रह सकता है, इन्द्रियोंको तभीतक वशमें रख सकता है, लज्जाको उसी समय तक धारण कर सकता है, नम्रताका अवलम्बन उसी समय तक कर सकता है, जबतक कि लीलावती स्त्रियोंके भौंह रूपी धनुषसे कानोंतक खींचे गये, श्याम