शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
पृष्ठ 25, कुल 544 में से
संदर्भ में पढ़ें( १४ )
लगती है । उसका बोलना चालना और देखना प्रभृति प्रत्येक कोम पुरुषको बन्धनमें बाँधता है ।
2. Gentle smile, emotions, bashfulness, timidity, the turning of face, the side-long casting of glances, speech, jealousy, quarrel and gesture ( —these ) are the various qualities by which the women become the chains for men.
श्रूचातुर्याकुञ्चित्ताचाः कटाचाः ।
सिन्ध्या वाचो लज्जिताश्चैव हासाः ॥
लीलामन्दं च स्थितं प्रस्थितं च ।
स्त्रीणांमेतद्भूषणं चायुधं च ॥३॥
चतुराईसे भौंह फेरना, आधी आँखसे कटाक्ष करना, मधु जैसी मोठी-मीठी बातें करना, लज्जाके साथ मुस्कराना, लीलासे मन्द-मन्द चलना और फिर ठहर जाना प्रभृति भाव स्त्रियोंके आभूषण और शस्त्र हैं ॥३॥
स्त्रियाँ कभी अपनी कमान सी भौंहोंको टेढ़ी करती हैं, कभी आँखें चलाती हैं, कभी लज्जाका भाव दिखाती हुई मन्द-मन्द मुस्कराती हैं, कभी शरीर तोड़ती हैं, कभी अंगड़ाई लेती हैं, कभी उंगलियाँ चटखाती हैं, कभी उभक-उभककर देखती हैं, और कभी मुँह फेरकर दूसरी ओर देखने लगती हैं, जिससे पुरुष समझे कि यह मेरी ओर नहीं देखती, कभी घूँघट मार