शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( १५ )
लेती हैं और कभी उसे खोल देती हैं—ये सब स्त्रियाँ क्यों करती हैं ? केवल अपना सौन्दर्य बढ़ाने और पुरुषोंको अपने ऊपर फिदा करके, उनसे मनमाने नाच नचवानेके लिये । पुरुषोंको अपने अधीन करनेके लिये, अबलाओंके पास तलवार, बन्दूक या वाण नहीं होते । उनको ईश्वर ने ये ही अमोघ अस्त्र दिये हैं । बन्दूक, तलवार और मैशिनगन जो काम नहीं कर सकती, वह काम ये अस्त्र करते हैं । किसीसे भी पराजित न होने वाले और बड़े-बड़े शूरवीर योद्धाओंको बात-की-बातमें धरा-शायी करने वाले बहादुर स्त्रियोंके अस्त्रोंकी मारसे, अपने होश-हवास खोकर, इनके दास बन जाते हैं ।
छप्पय ।
करत चातुरी भौह, नयनहू नचत चितैवो ।
प्रगटत चित्तको चाव, चावसों मृदु सुसकैवो ।
दुरत सुरत सकुचात, गात अरसात जम्हावत ।
उभक्तत इत उत देख, चलत ठिकत छविछावत ।
ए आभूषण तियनके, अंगमाहि शोभा धरन ।
अर येही सब-समानहैं, पुरुष-प्रन-मृग वस करन ॥३॥
सार—स्त्रियोंके हाव-भाव पुरुषोंके मारने के लिये अस्त्र और उनका सौन्दर्य बढ़ानेके लिए आभूषण हैं ।