भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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3. The skilfulness in turning the brows, the casting of oblique glances, sweet talk, smiling with shyness, walking slowly by gestures and stopping at intervals ( these ) are the ornaments as well as the weapons for women.

कचित्सुभ्रभंगैः कचिदपि च लज्जापरिणेतैः कचिद्वातिवस्तैः कचिदपि च लीलाविलसितैः ॥ नवोदानाभैर्भिवदनकमलैर्नैत्रचलितैः

स्फुरन्नीलाञ्जानां प्रकरपरिपूर्णा इव दिशः ॥४॥

कामी पुरुषोंको, कभी सुन्दर भौंहोंसे कटाक्ष करने वाली, कभी शर्मसे सिर नीचा कर लेने वाली, कभी भयसे भीत होने वाली, कभी लीलामय विलास करने वाली, नवीन व्याही हुई कामिनियोंके मुखकमलोंकी खूबसूरती बढाने वाले नीलकमलोंके समान चञ्चल नेत्रोंसे दशों दिशाएँ पूर्ण दीखती हैं ॥४॥

हालकी व्याहो हुई नवबधुओंमें कमान सी भौंहों से कटाक्ष करना, कभी लाजके मारे सिर नीचा कर लेना, कभी भयसे भीत होना, कभी अन्य प्रकारके नखरे करना—ये सब स्वभाव से ही होते हैं । प्रथम तो इस उद्वेगमें सुन्दरता आप ही बढ़ जाती है ; फिर उनके नखरे और नीलकमलसे चञ्चल नेत्र उनकी खूबसूरतीको और भी बढ़ा देते हैं । कामी पुरुषोंको, जिनके मनमें इनके चञ्चल नेत्र अपना घर कर लेते हैं—हर ओर,

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