शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
पृष्ठ 250, कुल 544 में से
संदर्भ में पढ़ें( २०६ )
दुनिया है वह सैयाद, कि सब दाममें इसके ।
आजाते हैं, लेकिन कोई दाना नहीं आता ॥
दुनिया वह जाल है कि, इसमें सभी फँस जाते हैं ; कोई बिचारशील हो इसमें फँसनेसे बचता है । जो इस जालमें नहीं फँसता, वही नरकोसे बचता और मुक्ति लाभ करता है ।
छप्यय ।
सब ग्रन्थनके ज्ञानवान अरु नीरिवान नर ।
तिनमें कोउ होत मुक्त-मारगमें तत्पर ॥
सबको देत बहाय, बंक-नयनी यह नारी ।
जाकी बाँकी मौह, नचत अतिही अनियारी ॥
यह कूँची करम कपाटकी, खेलनको जकृत फिरत ।
जिनके न लगत मन हगनमें, ते भवसागरको तरत ॥ ३ ॥
सार—सुन्दरी स्त्रियाँ पुरुषोंकी सद्गतिमें
बाधक हैं ।
62. One may be versed in the Shastras, reputedly wise and humble, but there are few who can claim the higher and better life —after death for, there is the oblique brow of women having beautiful eyes, moving in it which like a key opens the lock of the gate of hell,
—*—
१४