शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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अगर ग़रीब और मुहताज़ों को धन न दिया जाय, तो धन के होनेसे क्या लाभ ? वह धन निष्फल है । यदि पराया उपकार न किया जाय, तो सेवा निष्फल है । जिस स्त्री-संगम से पुत्र न पैदा हो, वह स्त्री-संगम वृथा है । यदि प्यारो के साथ जुदाई हो, तो जवानी वृथा है । ऐसी जवानी से क्या फ़ायदा ? सारांश यह है, कि जब स्त्री-पुरुष दोनों ही जवान हों, तभी काम-श्रीङ्गाका आनन्द है । बुढ़ापेमें क्या रक्खा है ? स्त्री-भोगका आनन्द जवानीमें ही है ; क्योंकि जवानीमें ही बदनमें ताकत रहती है और जवानीमें ही कामदेवका जोश रहता है । अगर स्त्रीका यौवन उतार पर आजाय, उसके स्तन सिङ्गुड़ जायँ वा धैलेसे लट्कने लगेँ, तब क्या आनन्द है ? उस समय स्त्री उल्टी बुरी लगती है । जो मज़ा है, वह नवीना नारीमें ही है । कहा हैः—
नववस्त्रं नवच्छत्रं नव्या स्त्री नूतनं गृहम् ।
सर्वत्र नूतनं शस्तं सेवकाभिः पुरातनं ॥
सब देशोंमें नया कपड़ा, नया छाता, नयी स्त्री और नया घर—ये अच्छे समझे जाते हैं । केवल नौकर और अन्न ये पुराने अच्छे समझे जाते हैं । कहा हैः—
शशी दिवसधूसरो गलितयौवना कामिनी, सरो विगतवारिजं मुखमनहारं स्वाकृतेः ।