शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( २३६ )
स्त्रियोंकी तारीफोंके नमूने ।
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संस्कृत कवियोंकी उक्तियाँ ।
सुविरलमौक्तिकतारे धवलशुक्लचन्द्रिकाचमत्कारे ।
वदनपरिपूर्णाचन्द्रे सुन्दरि राकाऽसिनात्र सन्देहः ॥
हे सुन्दरि ! तेरे हारके मोती तारोंकी तरह खिल रहे हैं । तेरे सफेद वस्त्र चाँदनीका चमत्कार दिखा रहे हैं और तेरा मुख पूर्णमासीके चन्द्रमाकी तरह शोभायमान है ; अतः तू निश्चय ही पौर्णिमा है ।
श्यामलेनांकितं बाले भाले केनापि लक्ष्मणा ।
मुण्वं तवांतरासुसमृद्धाऽकुलंखुजायते ॥ १ ॥
हे बाले ! तेरी पेशानी या मस्तक में जो एक काला-काला चिह्ना है, उससे तेरा चेहरा ऐसा मालूम होता है, गोया खिले हुए कमलके बीचमें भौरा सो रहा हो ।
स्मयमाननानां तत्र तां विलोक्य विलासिनीम् ।
चकोराश्चंचरीकाश्च मुदे परतरां ययुः ॥ २ ॥
उस मन्द-मन्द मुस्करानेवाली नायिका को देखकर चक्रों और भौरोंको खूब आनन्द आया ; यानी चकोर उसे चन्द्रमा समझ कर खुश हुए और भौरै कमल समझ कर ।