शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
पृष्ठ 303, कुल 544 में से
संदर्भ में पढ़ें( २५६ )
दोहा ।
जौलों सन्मुख नयनके, श्रबला श्रमृत-रूप ।
दूर भये ते सहज ही, होय यही विष-कूप ॥७४॥
सार—स्त्री सामने हो तो श्रमृत है, पर दूर हो तो विष है ।
74. A woman is like nectar so long as she is in front of the eyes. She becomes more painful than poison when removed from before the eyes.
दाग" और "महाकवि गालिब" हरिदास पगड कम्पनी, कलकत्ते से मांगावे । पयित्तजी उर्दू-कवियों पर आशोचनात्मक लेख मिलनेमें सिद्धहस्त हैं । हमने ये कविताएँ आपही की पुस्तकोंसे उद्धृत की हैं । बाबू रघुराज सिंह जी-५० के लिये महाकवि नज़ीर से भी हमने कुछ शेर ली हैं । उर्दू कवि-वचन-मालाके ये चारों दाने प्रत्येक हिन्दी जाननेवालेके देखनेकी चीज़ हैं । इन कवियोंकी एक-एक कविता ब्राह्मों रुपयेमें भी सस्ती है । लेखक महा- शयोने उर्दू न जानने वालोंके उभौतेके लिये, प्रत्येक कविताका हिन्दी अनु- वाद भी साथ-साथ कर दिया है । इन पुस्तकोंकी पबलिक ने अच्छी कदमी है । जिन हिन्दी-प्रसियोंने ये पुस्तके नहीं देखी हैं, वे इनके लिये ३१) मूल्य और ॥१॥ पोर्टेज—कुल ४ ) का लोभ न करें । ये सब आवेहयात या सुधारस का आनन्द देने वाली पुस्तके हैं । वहमी सज्जन वहममें गोते न लगावे, सूचनाको भूटी न समझें, इसीसे नीति, वैराग्य और श्रद्धा—इन तीनों शतकोंमें ही हमने मौके-मौकैसे इनके अधिक नमूने दिये हैं । जिन्होंने किसी मित्रके पास "नीतिपातक" और "वैराग्यपातक" देखे, उन्होंने जी जानसे मुग्ध होकर ये दोनों शतक तो माँगाये ही ; पर साथ ही "दाग" "गालिब" "ज़ौक" और "नज़ीर" भी माँगाये बिना न रहे ।