शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( २५६ )
सांर—स्त्रीही अमृत और स्त्री हो विष है । जब वह चाहे तब तो अमृत है और जब न चाहे तब विष है ।
75. There is no better nectar than a woman and no worse poison than a woman also. If she is loving, she is a creeper of nectar, but if she forsakes, she is verily a creeper of poison.
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आवर्तः संशयानामविनयभवनं पतनं साहसानाम् ।
दोषाणां सन्निधानं कपटशतमयं क्षेत्रमग्रत्वयानाम् ॥
स्वर्गद्वारस्य विघ्नो नरकपुरमुखं सर्वभायाकरगडम् ।
स्त्रीयन्वं केन सृष्टं विषममृतमयं प्राणिनां मोहपाशः ॥७६॥
सन्देहोंका भँवर, अविनयका घर, साहसोंका नगर, पाप- दोषोंका खजाना, सैकड़ों तरहके कपट और अविश्ववासका क्षेत्र, स्वर्ग-द्वारका विघ्न, नरक-नगरका द्वार, सारी मायाओंका पिठारा, अमृतके रूपमें विष और पुरुषोंको मोह-जालमें फँसाने वाला स्त्री- यन्त्र न जाने किसने बनाया ?
सुन्दरी स्त्रियाँ ऊपरसे गोरी पर भीतरसे काली होती हैं । इनका शरीर फूलकी तरह कोमल और कमनीय होता है, पर इनका हृदय वज्रवत् कठोर होता है । ये दान, मान, सेवा, अस्त्र और शस्त्र किसीसे भी वशमें नहीं होतीं । न कोई इनको