शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( २६५ )
यह युवती-यन्त्र कौन रच्यो, महा अमृत-विषको भ्रम्यो ? थिर चर नर किबर सुर असुर, सवके गल-वन्धन कर्यौ ॥७६॥
सार—स्त्री बड़ा ज्वर्दस्त जाल है। फिर भी लोग इसमें जोकर फँसते और बड़े खुश होते हैं, यह आश्चर्य्यकी बात है। इसमें एक बार फँसने पर, इससे निकलना कठिन है।
76. Who has created this machine in the form of woman who is the very seat of doubts, the house of insolence, the city of courage, the object of vices, the field of misbelief, full of hypocrisy, the obstructor to the gates of heaven, and the very gate of the city of hell, the basket of delusion, the poison in the garb of nectar and the snare for catching men ?
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सत्यत्वेन शशांक एष वदनीभूतो नेवेन्दीवर- इन्द्रे लोचनतां गर्तं न कनकैरप्यंगयिष्ठः कृता ॥ किन्त्वैवंकविभिः प्रतारितमनास्तत्त्वं विज्ञानन्पि त्वङ्मांसास्थिमयं वपुर्मुगद्वां मन्दो जनः सेवते ॥७७॥
अगर हमसे पक्षपात-रहित सच्ची बात पूछी जाय, तो हमको कहना होगा कि, चन्द्रमा लीला सुख नहीं, कमल उसके नेत्र नहीं ; उसका भी शरीर और सब प्राणियोंकी तरह हाड़, चाम और मांसका