शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
पृष्ठ 316, कुल 544 में से
संदर्भ में पढ़ें( १६६ )
सार—लोलावती चंचल स्त्रियों के हाव-भाव और नाज-नख़रों को मुहव्वतकी निशानी समझना नादानी है। यह तो उनका स्वभाव है।
78. The amorous plays of sportful women are quite natural to them but they arouse passion in the hearts of foolish men, just as a black bee hovers over a lotus being attracted by its redness which is natural to it.
—*
यदेतत्पूर्णेन्दुयुतिरसुदाराकृतिभं—
मुखाब्जं तन्वंगाः किल वसति यत्राधरमधु ।
इदं तावत्याकुटुम्बफलविवातीविरसं—
व्यतीतेऽस्मिन्काले विषमिव भविष्यत्यसुखदम् ॥७६॥
स्त्रीका पूर्णिमाके चन्द्रमाकी छविको हरनेवाला कमलसुख, जिसमें अधरामुत रहता है, मन्दारके फलकी तरह अज्ञात या यौवनावस्था तक ही अच्छा मालूम होता है ; समय बीतने यानी बुढ़ापा आने पर, वही कमल-सुख अनारके पके और सड़े फलकी तरह विष सा हो जाता है ॥७६॥
•खुलासा—जिस तरह अनारका फल अपने समयमें अमृत का मज़ा देता है, पर समय निकल जाने पर बर्ज़ायके और कड़वा हो जाता है ; उसी तरह स्त्रीका पूर्णोके चाँदको शामाने