शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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वाला कमल सा मुह उठती जवानी या भर-जवानीमें ही अमृत सा रहता है । जवानी दीवानीके जाते ही, वह सड़े हुए अनारके फलकी तरह निकम्मा और विषसा हो जाता है ; क्योंकि बुढ़ापा आते ही दाँत गिर जाते हैं, गाल पिचक जाते हैं, चमड़ेमें झुर्रियाँ पड़ जाती हैं और सुखों चली जाती हैं । बेकन महोदय कहते हैं—Beauty is as summer fruits which are easy to corrupt and can not last. सौन्दर्य्य श्रीष्म ऋतुके फलोंके समान है, जो जल्दी ही सड़ जाते और अधिक समय तक नहीं उहर सकते ।
दोहा ।
अथर मधुर मधु सहित सुख, हूतौ सबन शिरमौर ।
सो अब बिगरे फलन-सम, भयौ और सो और ॥७६॥
सार—स्त्रीको सारी शोभा जवानीमें ही ह । जवानी गई, फिर कुछ नहीं ।
79. The beautiful lotus-like face of a woman that surpasses the beauty of the full-moon having honeyed lips in it is very pleasant in young age only but when that time is past it becomes painful like poison just like the fruit of Mandara.
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उन्मीलत्रिवलीतरङ्गनिलया प्रोत्तुङ्गपीनस्तन-
दन्देनोयतचकवाकमिथुना वक्रान्धुजोद्गासिनी ॥