शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( २१ )
2. The natural ornaments of a woman are her face which puts to shame even the moon, her eyes which laugh at the lotuses, the colour of her body which dims even the lustre of gold, her hair which surpasses in beauty the swarm of bees, her breast that outstrips the beauty of the forehead of an elephant, the two big hips and the sweet voice which attracts the mind.
स्मितं किञ्चिद्भक्त्रे सरलतरलो दष्टिविभवः
परिष्यन्दो वाचामभिनवविलासोक्तिससः ॥
गतीनाभारम्भः किसलयितलीलापरिकरः
सृष्टशंत्यास्ताख्यं किमिह नहि रम्यं मृगद्वयः ॥६॥
उठती जवानीकी मृगनयनी सुन्दरियोंके कौन काम मनोगुणधर नहीं होते ? उनका मन्द-मन्द मुस्कराना, स्वाभाविक चञ्चल कटाक्ष, नवीन भोग-विलासकी उक्तिसे रसीली बातें करना और नखरेके साथ मन्द-मन्द चलना—ये सभी हाव-भाव कामियोंके मनको शीघ्र ही वशमें कर लेते हैं ॥६॥
जवानीमें क्रदम रखने वाली, उठती जवानीकी मृगनयनी सुन्दरियोंका धीरे-धीरे हँसना, स्वभावसे चञ्चल नेत्र चलाना, मीठी-मीठी रसीली बातें करना और नखरे एवं अजीब नाज़ों-अदा के साथ धीरे-धीरे क्रदम रखकर चलना—ये हाव-भाव कामी पुरुषोंके होश-हवास ख़ता कर, उनको इनका गुलाम बना देते हैं ; अर्थात् कामी पुरुष स्त्रियोंके इन हाव-भाव और नाज़ों-अदाओंको देख-देखकर, अप्ठनी सुध-दुध लो, पागलसे ही जाते