भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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( २३ )

शरीर । ध्यान करने योग्य क्या है ? उनका नवयौवन और विलास ॥७॥

मनुष्यके पाँच इन्द्रियाँ होती हैं :—( १ ) आँख, ( २ ) नाक, ( ३ ) कान, ( ४ ) जीभ, और ( ५ ) त्वचा । आँखका काम देखना, नाकका सूँघना, कानका सुनना, जीभका चखना और त्वचाका स्पर्श करना है । आँख रूप देखना चाहती है, नाक सुगन्धित पदार्थ सूँघना, कान रसोलो बातें सुनना, जीभ सुस्वादु पदार्थ चखना और त्वचा कोमल वस्तु छूना चाहती है । कामी पुरुषोंकी पाँचों इन्द्रियोंकी सन्तुष्टिके लिये, भगवान् ने एक सुन्दरी नारी ही पैदा कर दी है । मतलब यह कि, रसिकोंकी पाँचों ज्ञानेन्द्रियोंकी सन्तुष्टिके सामान एक कामिनीमें ही मौजूद हैं । भुगनयनियोंके सुन्दर मुख आँखोंके देखनेके लिये हैं । उनके मुँहकी सुगन्धित भाफ नाकके सूँघनेके लिये है । उनके मिश्रोत्से भी मीठे और मधुर बचन कानोंके सुननेके लिये हैं । उनके नीचले होठका अमृत-समान स्वादिष्ट रस जीभके चखनेके लिये है और चमड़ेको छूकर सुखी होनेके लिये उनका मल्लमलसे भी कोमल शरीर या उनके पैरोंके तलवे हैं तथा ध्यान करनेके लिये उनकी नयी जवानी और उनकी नाज़ी-अदा है । सारांश यह कि, सारे सुखं एक सुन्दरी ही में मौजूद हैं ।

अगर कोई यह कहे कि, नहीं जी, यह सब कवियोंकी लीला—उनके बढावे हैं, तो हम यही कहेंगे कि, आप उनसे