भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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( २६ )

9. Whose minds are not overpowered on this earth by such beautiful women whose body is decorated by saffron and sandal and on whose white breasts garlands are hung and in whose lotus-like feet anklets sound like swans ?

सूतं हि ते कविरा विपरीतबोधा

ये नित्यमाहुर्वला इति कामिनीनाम् ॥

याभिर्विलोलतरतारकदृष्टिपातैः

शकादयोऽपि विजितास्त्वबलाः कथं ताः ॥१०॥

स्वियोंको “अबला” कहनेवाले श्रेष्ठ कवियोंकी बुद्धि निश्चय ही उल्टी है। भला, जो अपने नेत्रोंके चक्कल कटाक्षोंसे महाबली इन्द्रादिक देवताओंको भी मार लेती हैं, वे “अबला” किस तरह हो सकती हैं ? ॥१०॥

जो कोमलाङ्गी कामिनियाँ, बिना अस्त्र-शस्त्रोंके, अपनी दृष्टिमात्रसे, जगत्-विजयो योद्धाओंको तो बात ही क्या है, त्रिलोकीका पलक मारते संहार कर डालनेकी शक्ति रखने वाले शङ्कर और महाबली इन्द्रादिक देवताओंको भी अपने वशमें करके, मनमाने नाच नचानेको शक्ति रखती हैं, और उन्हें अपने इशारोंपर नचाती हैं, उन्हें “अबला” कहनेवाले कवि निश्चय ही पागल हैं—उनकी मति मारी गई है। सबलाओंको अबला कहने वाले यदि मूर्ख नहीं, तो क्या अहम्भन्द् हैं ?