शृंगार शतक

शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
Devanagarihipublished544 पृष्ठ
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श्रृङ्गारशतक
कन्दर्पकलाने, उसे नींदके बशीभूत जान, यारसे मिलनेकी यानी । उसने उठकर सोलह, श्रृंभार किये और सजधज कर यारसे मिलने चली । घरमें चोरी करनेकी गरजसे आया हुआ चोर भी, राहमें उसके क़ीमती जे वरात छीन लेनेकी इच्छासे, उसके पीछे लग लिया ।
Popular Press—Calcutta.