शृंगार शतक

शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
Devanagarihipublished544 पृष्ठ
पृष्ठ 434, कुल 544 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 434
भुङ्गारशतक
राजाने गुणनिथिका वरदमुक्त किया, कन्दुकलाको जेलखान भेजा, चोरको कड़े लाख रुपये इनीस दिये और गुणनिथिका अपना दोषान बताकर, उसे अपनी कन्या भी ब्याह दी । वुरको दुरा और भलको भला फल मिला । पृष्ठ ३५५।६०
Popular Press—Calcutta.