भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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३१ )

छुड़ा सकती हैं ; फिर कामदेव उनके हुकममें है, यह और भी राजवकी है। वे प्रेसी स्त्रियोंसे कौन अपनी रक्षा कर सकता है ? केवल वही उनसे बच कर रह सकता है, जो उनके दृष्टिपथमें न आवे । शायद इसीलिए, मोक्ष-कामी पुरुष मनुष्यों की बस्तियाँ छोड़ कर, निर्जन बनमें जाकर, आत्मोद्धारकी चेष्टा करते हैं ; क्योंकि बनमें न कामिनी होंगी और न वे अपने सेवक कामदेवको पश्चशर चलाकर अपना शिकार मारनेका हुकम देंगी ।

दोहा ।

कामिनि हुक्मी काम यह, नैन सैन प्रगटात ।

तीन लोक जीव्यौ मदन, ताहि करत निज हात ॥११॥

सार—कामदेव स्त्रियोंका सेवक है ।

11. Surely Kamdev ( Cupid ) is the obedient servant of women, because he, at once overpowers that man who is made their mark.

केशा संयमिनः श्रुतेरपि परं पांगते लोचने

चान्तर्वकृत्रमपि स्वभावशुचिभिः कीर्णं द्विजानां गणैः ॥

मुक्तानां सतताधिवासस्चिरं वचोजकुम्भद्वयं

चेत्थं तन्वि वपुः प्रशांतमपि ते श्लोभं करोत्येव न ॥१२॥

ऐ कृशाङ्गि ! हे, नाजनी ! तेरे बाल साफ-सुधरे और सँवारे हुए हैं, तेरी आँखें बड़ी-बड़ी और कानोंतक हैं, तेरा मुख इमभाव