भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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बड़ा आश्चर्य है, उसके पास न तीर था न पिस्तौल । पर हे परमेश्वर, उसने मेरे दिल पर फिर क्या चीज़ ताककर मारी, जो मैं लौट-पोट हो गया ?

मौलाना हाजी कहते हैं :—

था कुछ न कुछ, कि फ़ाँस सी इक दिल में चुम गई ।

माना कि उसके हाथमें, तीरो सनां न था ॥

महाकवि गालिब कहते हैं :—

इस सादगी पै कौन न मरजाये ऐ खुदा ! ।

लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं ॥

दोहा ।

अति अद्भुत कमनैत तिय, करमें बाण न लेत ।

देखो यह विपरीत गति, गुण ते बाँधे देत ॥ १३ ॥

सार—स्त्रियों के पास कोई अस्त्र-शस्त्र नहीं रहता, वे केवल अपनी चतुराईसे ही पुरुषोंको वशमें कर लेती हैं, यह अचम्भेकी बात है ।

13. O beautiful girl, how nice is your skilfulness in the use of the bow, because you do not pierce the heart of men by arrows but by only bending the bow ( in other words, by your charms only ).