भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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हे बाले ! लीलासे ज़रा-ज़रा खुले हुए नेत्रोंसे सुन्दर कटाक्ष हम पर क्यों फैकती है ? विश्राम ले ! विश्राम ले ! हमारे लिये तेरा यह श्रम व्यर्थ है । क्योंकि अब हम पहले जैसे नहीं रहे ; अब हमारा छल्लोरपन चला गया, अज्ञान दूर हो गया । हम बनमें रहते हैं और जगज्जालको तिनकेके समान समझते हैं ।

93. Maiden ! why are you casting your sweet and sportful glances at me ? Pray, stop there. Your efforts in this connection are useless. I am a changed man now. Youth has passed away. I long to live in the woods now. My illusion is gone. I consider the worldly bondage as that of straw.

—*—

इयं बाला मां प्रत्यनवरतभिन्दीवरदल—

प्रभाचेरं चक्षुः क्षिपति किमभिप्रेतमनया ॥

गता मोहोऽस्माकं स्मरशबरबाणव्यतिकर—

ज्वलज्ज्वालाः शान्तास्तदपि न वराकी विरमति ॥६४॥

इस बालाका क्या मतलब है, जो यह अपने कमल-दलकी शोभाको तिरस्कार करनेवाले नेत्रोंको मेरी ओर चलाती है ? मेरा अज्ञान नाश हो गया और कामदेव रूपी भीलके बाणोंसे उत्पन्न हुई अग्नि भी शान्त हो गई, तथापि यह मूर्खा बाला विश्राम नहीं लेती ! ॥६४॥

94. What does this young woman mean by casting her eyes, which surpass the beauty of the lotuses, constantly on me ? I