भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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हकीकत महर्षि असार से पूछ ।

मजा अंगूर का मैस्वर से पूछ ॥

दिले महजूर से सुन लज्जते वस्त्र ।

निशाने आकिषत बीमार से पूछ ॥

जो सब तरहकी बातें जानता है, तत्त्वज्ञ या रहस्यज्ञ है, उसीसे तत्त्वकी बात पूछनी चाहिये । अंगूरमें क्या मजा है, यह अंगूरी शराब पीने वालेसे पूछना चाहिये । वही उस विषयमें कह सकता है ।

जिस दिलने माधुर्यासे मिलनेके लिए अनेक तरहकी तकलीफें उठाई हैं, उसीसे वस्त्रका मजा या मिलनेके आनन्दकी बात पूछनी चाहिये । जिस रोगीने अनेक तरहके कष्ट उठाकर आरोग्य लाभ किया है, वही तन्दुरुस्तीकी कीमत जानता है ।

हमें भी स्त्रियोंके सम्बन्धमें थोड़ा-बहुत अनुभव है, हमने उनके संयोग और वियोग दोनों ही देखे हैं, उनकी सेवा-शुश्रूषाओंसे सुखी और उनकी मंत्रणाओंसे लाभान्वित हुए हैं, अतः हम भी जोरके साथ कहते हैं :—निश्चय ही स्त्री-बिना संसारके सभी सुखैश्वर्य अलौने—फीके और बेमज़े हैं । स्त्री ईश्वरके संसार रूपी बगीचेका सर्वोत्तम फूल है । उसीसे ईश्वरकी सृष्टिकी शोभा है । अगर स्त्री न होती, तो यह जगत् अन्धकारपूर्ण, निर्जन और भयानक होता । जिस करोड़पतिके घरमें सती स्त्री नहीं है, उसका घर साक्षात् श्मशान है और जिस दक्षिणीके घरमें पतिव्रता, लज्जावती और मधुरभाषिणी