शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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इतनी होशियार क्यों ? ) पुरुषको हर चीज़ से काम पड़ता है, उसे बहुतसे भंभटोंका सामना करना पड़ता है, इसलिए वह छोटी-छोटी बातोंसे घबरा उठता है ; लेकिन स्त्री इतने भंभटों से सम्बन्ध नहीं रखती, वह तटस्थ पुरुषकी तरह हरेक बातको बाहरसे देखती रहती और उनके यथार्थ मूल्यको जानती है ; इसीसे वह उल्लभनको सहजमें सुलझा सकती है। शास्त्रोंके पढ़नेमें वह मर्दों से कम हो तो हो, पर उसकी नैसर्गिक प्रज्ञा—स्वाभाविक बुद्धि अत्यन्त सूक्ष्म होती है। जेम्स नार्थ कोट ।
पतिव्रता स्त्री ईश्वरकी सृष्टिकी उत्तम-से-उत्तम औषधियोंमें सर्वश्रेष्ठ है। वह पतिके लिए देवता और सारे गुणोंकी मूर्ति है। वह पतिका बहुमूल्य हीरा और जवाहिरातका खज़ाना है। उसकी आवाज़में मधुरता और उसके मुस्करानेमें आनन्द है। उसकी भुजा उसकी शरण और उसकी तन्दुरुस्तीकी दवा है। उसकी मिह्नत उसकी दौलत और उसकी किफायतशारी उसका लायक मुन्तज़िम है। उसके होठ उसके मंत्रों और उसकी प्रार्थना उसकी सर्वोत्तम सहायका है। जर्मी टेलर ।
तुमने कई बार देखा होगा कि, जिस सवालको तुम घण्टोंमें भी हल नहीं कर सकते, उसे औरतें क्षणभरमें हल कर देती हैं और उनका जवाब निहायत दृस्त और सही होता है।
निस्सन्देह सारे संसारका आनन्द भार्या शब्दमें है। दिनभरके काम-धन्धों और भगड़ोंसे निपटकर जब मर्द रातको घरमें आता है, तब उस थके हुएको अग्न जलती हुई मिलती है, खाना तैयार