भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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उलभनको सुलभता नहीं सकता, उस समय उसकी सच्ची साधन— उसकी प्यारी पत्नी अपनी कुशाग्रबुद्धिसे फौरन मुश्किलको हल कर देती है। अनेक बार दिल्लीश्वर शाहन्शाह अकबर प्रसिद्ध हाजिरजवाब राजा बीरबलसे अत्यन्त कठिन और टेढ़े सवाल कर बैठते थे। वह उनके सवालोंका जवाब फौरन ही दे देते थे, लेकिन कभी-कभी गाड़ी रुक भी जाती थी। ऐसे मौके पर बीरबल घबराकर औंधे मुँह पड़े रहते और शोकके मारे पागलसे हो जाते थे। उस वक्त उनकी पत्नी या पुत्री ही, उनकी मुश्किलको हल करके, उनके शोक-सन्तापको दूर करती थीं। शारीरिक बलमें स्त्रियाँ चाहे पुरुषों की बराबरी न कर सकती हों, पर बुद्धिमें वे पुरुषोंसे कम नहीं। किसी-किसी बातमें तो उनकी सूक्ष्म पुरुषों की अपेक्षा गहरी होती है। पुरुष कहते हैं, कि स्त्री की बुद्धि प्रलयंकारी होती है, पर यह कहावत सभी हालतोंमें ठीक नहीं। हमने स्वयं देखा है कि, बाज-बाज औकात हम कारोबार-सम्बन्धी इलभनमें ऐसे इलभ जाते हैं, कि दिनभर सोचने पर भी उसका कूल-किनारा नहीं होता। शामको घर आकर उदास मनसे बैठ जाते हैं। हमारी घरवाली हमारे चेहरेका रंग-दंग देखकर ताड़ जाती है, कि आज कुछ दालमें काला है। वह हमसे हमारी उदासीका कारण पूछती है और हमें कारण बताना ही पड़ता है। वह कहती है—“बड़े कारोबार वालोंके पीछे हजारों भंफट लगे ही रहते हैं। आप इस तरह बाढ़-बातमें रूझ कीजियेगा, तो आपका स्वास्थ्य नष्ट हो जायगा। हानिकी पूर्ति सहजमें हो

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