भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

Devanagarihipublished544 पृष्ठ

पृष्ठ 77, कुल 544 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 77

( ६४ )

15. If high breasts, restless eyes, moving brows and the two lips like new leaves give pain to a lustful man, they are justified in doing so because ( Cupid ) Kamadev has marked the words "Good fortune" in the forehead of a woman, but it is incomprehensible why that line of hair passing through the middle of the belly aggravates the pain which as an arbitrator should abate it.

गुरुणा स्तनभारेण मुखचन्द्रेण भास्वता ।

शनैश्चराभ्यां पादाम्ब्यां रेजे ग्रहमयीव सा ॥१६॥

वह स्त्री गुरु स्तनोके भारसे, भास्करके समान प्रकाशमान मुख-चन्द्रसे और शनैश्चरके सट्ठ मन्दगामी दोनों चरणोंसे ग्रहमयी सी मालूम होती है ॥१६॥

खुलासा—वह स्त्री अपने पूर्णोन्नत बृहस्पतिके समान दोनों कुर्चोंसे, सूर्योके समान प्रकाशमान मुखचन्द्रसे और मन्दगामी शनैश्चरके समान धीरे-धीरे चलनेवाले दोनों चरणकमलोंसे ग्रह-पुञ्ज या रौशन मज्जमा-उल-नजूम सी जान पड़ती है ।

बृहस्पति, चन्द्रमा, सूरज और शनैश्चर—इन तेजस्वी ग्रहोंके चिह्न स्त्रीमें पाये जाते हैं । इसीसे कवि महोदय कहते हैं कि, वह नाज़नी-ग्रहमयीसी शोभित होती है । उसके स्तन-

ॐ गुरु, भास्वान् प्रभृति शब्दोंके दो-दो अर्थ हैं । जैसे, गुरु=भारी और बृहस्पति । चन्द्रमा=चन्द्रवत् और चन्द्रमा । भास्वान्=प्रकाशमान और सूरज । शनैश्चर=मन्दगामी और शनैश्चर । सनीचर मन्दगामी प्रसिद्ध है ।

शृंगार शतक · पृष्ठ 77, कुल 544 में से · BharatKosha